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Showing posts from October, 2017
2 Nov से कौन 2 सी राशि वालों के लिए बनेगा से "मालव्य महापुरुष & नीच भंग ...
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नवंबर 2017 मे मेष राशि को मिलेगा ये सब। monthly horoscope november 2017 ...
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Saturn Moon transit in Sagittarius on 26 October 2017
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दशा अंतरदशा और गोचर से सटीक भविष्यवाणी Accurate Predictions through Dash...
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गोचर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य - जन्म कुंडली में किसी घटना के होने में दशाओं के साथ गोचर के ग्रहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. यदि जन्म कुंडली में दशा अनुकूल भावों की चल रही है लेकिन ग्रहों का गोचर अनुकूल नहीं है तब व्यक्ति को संबंधित भाव के फल नहीं मिल पाते हैं. इसलिए किसी भी घटना के लिए दशा के साथ गोच़र भी अनिवार्य माना गया है. यदि गोचर अनुकूल है लेकिन दशा अनुकूल नही है तब भी फलों की प्राप्ति नहीं हो पाती है. गोचर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में आपको जानकारी देने का प्रयास इस लेख के माध्यम से किया जाएगा. जब जन्म कालीन सूर्य के ऊपर से शनि का गोचर होता है तब उस भाव के कारकत्वों से संबंधित फलों में कठिनाई का अनुभव व्यक्ति विशेष को होता है. जब जन्मकालीन सूर्य पर से बृहस्पति का गोचर होता है या उसकी दृश्टि पड़ रही होती है तब व्यक्ति को आजीविका में पदोन्नति मिलती है. वह अपनी आजीविका में वृद्धि भी पाता है और विकास की ओर बढ़ता है. जन्मकालीन बुध पर से बृहस्पति का गोचर या दृष्टि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है. कुंडली के दूसरे या ग्यारहवें भाव पर गुरु की ...
गुरु ग्रह का राशि परिवर्तन 2017-2018, jupiter ascending by Dev niranjan
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क्या होता है परिवर्तन योग ? (Parivartan Yoga) | ज्योतिष (Vedic Astrolog...
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इस सप्ताह इन राशियों पर होगी प्यार और पैसो की बारिश साप्ताहिक राशिफल
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কর্ম
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जन्म कुंडली मे प्रथम भाव क्रियमाण पंचम भाव संचित व नवम भाव प्रारब्ध होता है।क्रियमाण व संचित पर मनुष्य का अधिकार होता है लेकिन प्रारब्ध पर नही। क्रियमाण अच्छा या बुरा शुभ या अशुभ जो भी मनुष्य करता है उनपर पूर्ण अधिकार रहता है।अर्थात मनुष्य स्वतंत्र हैं वह शुभ या अशुभ कुछ भी कर सकता है मनुष्य चाहे तो शास्त्र विहित कर भी कर सकता हैऔर शास्त्र के प्रतिकूल कर्म भी।स्वतंत्र रूप से कुछ भी कर सकता है। जिस प्रकार हमारा कर्म होगा ठीक उसी प्रकार संचित भी होगा।अर्थात कर्म पर जब हमारा अध िकार है तो संचित पर भी हमारा अधिकार होगा। हम जैसा कर्म करते हैं उसी प्रकार संचित होता है ।इसी संचित के आधार पर प्रारब्ध का निर्माण होता है जो पूर्व जन्म कृत कर्म के भोग पर हमें भोगना पड़ता है। प्रारब्ध को बदलना आसान नहीं है लेकिन सन्मार्ग पर चल कर अपने कर्म को बदलना कठिन भी नही। गीता में भगवान इसलिये केवल कर्म के प्रति सजगता का पथ पढ़ाते हैं जिसका वर्तमान कर्म ठीक है उसका संचित अच्छा होगा ।जब संचित अच्छा है तो स्वतः प्रारब्ध भी अच्छा होगा । पूर्व जन्म के क्रम के आधार पर ही प्रारब्ध वस हमे भोगना पड़ता है। सुख व दुख ...